जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर सख्त कार्रवाई: 8 एमबीबीएस छात्र 6 महीने के लिए निलंबित

Sat 31-Jan-2026,10:19 PM IST +05:30

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जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर सख्त कार्रवाई: 8 एमबीबीएस छात्र 6 महीने के लिए निलंबित Jabalpur Medical College News
  • रैगिंग मामले में 8 एमबीबीएस छात्र 6 माह के लिए निलंबित.

  • हॉस्टल से निष्कासन और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना.

  • एनएमसी नियमों के तहत जीरो टॉलरेंस नीति लागू.

Madhya Pradesh / Jabalpur :

Jabalpur / जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के एक गंभीर मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त और उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई की है। एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद एमबीबीएस तृतीय वर्ष (बैच 2023) के आठ छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही इन सभी छात्रों पर 10-10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। कॉलेज प्रशासन के इस फैसले को मेडिकल शिक्षा संस्थानों में रैगिंग के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

यह मामला मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर-1 से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, एमबीबीएस प्रथम वर्ष (बैच 2024) के एक जूनियर छात्र ने करीब एक सप्ताह पहले कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत सौंपी थी। छात्र ने अपनी शिकायत में बताया कि कुछ सीनियर छात्रों ने उसे काफी देर तक कमरे के बाहर खड़ा रखा और उसके साथ मानसिक व शारीरिक रूप से रैगिंग की। छात्र ने यह भी कहा कि इस व्यवहार से वह मानसिक रूप से परेशान और असुरक्षित महसूस कर रहा था।

शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और एंटी-रैगिंग कमेटी को जांच के निर्देश दिए। कमेटी ने पीड़ित छात्र के बयान, अन्य छात्रों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रैगिंग की घटना वास्तव में हुई थी और इसमें आठ सीनियर छात्र सीधे तौर पर शामिल थे। इसके बाद कमेटी ने इन छात्रों को दोषी ठहराते हुए कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।

कॉलेज प्रशासन ने एंटी-रैगिंग कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सभी आठ आरोपित छात्रों को छह महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया है। साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है, ताकि परिसर में किसी तरह का भय या दबाव का माहौल न बने। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक छात्र पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाए कि रैगिंग जैसी गतिविधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

कॉलेज प्रशासन ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC), नई दिल्ली द्वारा 18 नवंबर 2021 को जारी गजट नोटिफिकेशन के नियमों के तहत की गई है। एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मेडिकल संस्थानों में रैगिंग को लेकर “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जाती है और दोषी पाए जाने पर कठोर दंड का प्रावधान है।

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रैगिंग एक गंभीर अपराध है और इससे छात्रों के मानसिक व शैक्षणिक जीवन पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “कॉलेज या हॉस्टल परिसर में रैगिंग जैसी गतिविधियों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में यदि कोई छात्र इस तरह की हरकतों में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ निष्कासन जैसी और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

कॉलेज प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच यह संदेश गया है कि संस्थान सुरक्षित और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही यह कदम जूनियर छात्रों को बिना डर के अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देने का भरोसा भी देता है।